Case Status - CRIMINAL MISC. WRIT PETITION
FIR में पुलिस (SO सूर्यभान) ने लिखा है कि —
👉 राजकुमार राम को गैंग का लीडर बताया गया है
👉 बाकी लोगों को उसके गैंग का सदस्य बताया गया है
आरोप यह है कि:
✅ सभी लोग मिलकर एक संगठित गैंग चलाते हैं
✅ अवैध तरीके से पैसा / लाभ कमाते हैं
✅ क्षेत्र में डर और आतंक का माहौल बनाते हैं
✅ लोग इनके खिलाफ शिकायत या गवाही देने से डरते हैं
📌 FIR में यह भी लिखा है कि पहले से इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं
📌 उसी आधार पर जिलाधिकारी की अनुमति से➡️ गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है
👉 मतलब FIR का मुख्य आरोप है:
आप लोग गैंग बनाकर अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और समाज में डर पैदा करते हैं — इसलिए गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है।
📌 The complete copy of the FIR can be downloaded below.
Quashing FIR Ground Fact
1. Specific Role Mention नहीं है
2. General Allegation है
3. Old Cases को Base बनाया गया है
4. Public Fear का कोई Proof नहीं
5. Gang Chart Approval Mechanical हो सकता है
Simple Court Language में:
FIR सिर्फ assumption और पुराने केस पर बनी है न कि किसी fresh organized gang activity पर
➡️ यह Quashing का मजबूत ground बनता है
Order/Judgement
📌 केस क्या था?
👉 यह एक Criminal Misc. Writ Petition थी
जिसमें याचिकाकर्ता FIR दिनांक 30.10.2024 को रद्द (Quash) कराने हाईकोर्ट गए थे।
📅 22.11.2024 को क्या हुआ?
कोर्ट ने कहा:
➡️ याचिकाकर्ताओं के वकील पहले इन दोनों का क्रिमिनल इतिहास (पुराने केस आदि) स्पष्ट करें।
➡️ मामला फिर से नई तरह से पेश किया जाए।
📅 12.12.2024 को क्या हुआ?
➡️ याचिकाकर्ता की तरफ से समय माँगा गया
ताकि वे
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संशोधन आवेदन (Amendment Application)
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सप्लीमेंट्री एफिडेविट
दाखिल कर सकें
जिसमें उनका क्रिमिनल बैकग्राउंड रिकॉर्ड पर लाया जा सके
📌 अगली तारीख दी गई: 18.12.2024
📅 18.12.2024 को क्या हुआ? (सबसे महत्वपूर्ण)
➡️ याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे इस रिट याचिका को वापस लेना चाहते हैं
और आगे की कार्यवाही के लिए
👉 CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता) के तहत उपलब्ध दूसरे उपाय अपनाएंगे
⚖️ कोर्ट का अंतिम आदेश
✅ रिट याचिका वापस लेने की अनुमति के साथ खारिज (Dismissed as Withdrawn) कर दी गई।
👉 मतलब:
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हाईकोर्ट ने FIR को रद्द नहीं किया
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केस बंद नहीं हुआ
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सिर्फ यह रिट वापस ले ली गई
📌 लेकिन उन्हें अनुमति दी गई है कि वे
➡️ निचली अदालत / सेशन कोर्ट में
➡️ या CrPC के तहत (जैसे 482, बेल, डिस्चार्ज आदि)
दूसरा कानूनी उपाय ले सकते हैं।
🔎 आसान भाषा में निष्कर्ष
👉 FIR अभी भी बनी हुई है
👉 हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली
👉 लेकिन आगे दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट मिल गई है
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